प्रयोगशाला

शनिवार, 3 मई 2014

मोहरा


मैं लाया गया था
तुम्हारी ज़िंदगी मे
ये सच है,
मैं मोहरा था
लेकिन तुम्हें तो पता था
प्रस्तुतकर्ता मुकेश कुमार सिन्हा पर 9:35 pm
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

ब्लॉग आर्काइव

  • ►  2019 (2)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  जनवरी (1)
  • ▼  2014 (34)
    • ▼  मई (8)
      • तुम और मैं
      • एक पहेली
      • काला जादू
      • ब्रेकिंग
      • परछाई
      • मोहरा
      • चुपके से
      • गाँव की मिट्टी
    • ►  अप्रैल (2)
    • ►  मार्च (4)
    • ►  फ़रवरी (20)

मुझे पढ़ने के लिए क्लिक करिये !

संदेश
Atom
संदेश
टिप्पणियाँ
Atom
टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट

  • समलैंगिकता
    इक देह की तड़प उसकी उसकी रूह को तड़पती एक रूह और उस तड़पते देह से दूर  तीसरी तरफ एक रूह को तड़पती  एक जिस्म कुछ अनसुलझे चेहरे  सुलझा रह...
  • घुसपैठिये
    ठंढ मे कंपकपाती देह लिए  रोटी की जुगाड़ मे निकलने को  स्थूलकाय लंगड़ाती घिसटती  हर दो कदम के बाद लौट आती  अंजान भय घुसपैठियों का  उसी सा द...
  • कल्लू परछाई
    जब मुझे नहीं पता चलता तब समाज बता देता है तू तो चोर है और तब मैं भागता हूँ ढूँढता हूँ वकील और दोस्त पुलिस जब कुछ लोग बता देते हैं ...
  • छिपी दो आँखें
    कुछ की कुर्सी गई, कुछ ने बेच डाला हांडी-बर्तन  भोले मुख्यमंत्रियों को पगला दिया सबकी कुंडली देखता है, कहता है प्रधानमंत्री बनोगे इस बार ...
  • लोकतंत्र का एक पर्व
    इसी दुनिया के एक कोने में सुना है,  कोई पर्व मना रहे हैं कहते हैं लोकतंत्र है लहू के धब्बों के बीच चिथडो में पैदा और आवारगी में पली...
  • काला जादू
    काला जादू में अक्सर देखिये मन्त्र पढता है जादूगर सब कुछ झोंक कर भर लेना चाहता है झोली वही ढीली झोली जिसे मंच पर वो उडेलता है सूरज की ...
  • राजगद्दी
    माफी भाई कहता है माफ कर दो बच्चे खेल-खेल में गलती कर जाते हैं बहन नहीं मानती, उधेड़े अधोवस्त्र और उनसे झांकते चोटिल सिसकते अंग उसे रो...
  • प्रयोगशाला
  • तुम और मैं
    उम्र के कई पडाव हर पडाव की एक उम्र जैसे कि तुम और मैं और हमारे बीच का सम्बन्ध कुछ न होकर भी सब कुछ उन संबंधो की एक उम्र गुजरते वक्त ...
  • चिंता
    रात अक्षरशः आगे बढ़ती है मैं कविता नहीं कहता हूं इससे पहले कि सो जाए दुनिया बच्चों को लोरियां सुनाता हूं!

Translate

मेरे बारे में

मुकेश कुमार सिन्हा
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें

मेरी गतिविधियां

  • लल्लू रिटर्निंग अधिकारी
  • फ़ेसबुक
यात्रा थीम. Blogger द्वारा संचालित.